वह युवा नहीं जो डर गया,
जो बिन लड़े मर गया।
संघर्षों से वह भाग चला,
कर्तव्यों को वह त्याग चला।
अरे युवा वह है जो न डरे,
जो लड़ के मरना स्वीकार करे।
मरना तो हम सबको एक दिन है,
क्यों न मरने से पहले हम कुछ काम करें।
कुछ स्वयं के खातिर,
कुछ देश के खातिर,
कुछ इस धरा के नाम करें।
— स्वरचित काव्य —
रचयिता: आजाद कृष्ण कुमार

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